क्या अपने आज का समाचार सुना ?
क्या वह समाचार अच्छा था या बुरा?
मैं यह मानता हूं कि हम लोग हर रोज कहीं तरह-तरह की खबरों को सुनते होंगे.
यह खबरें हम tv पर, रेडियो में ,समाचार से, और अखबार में भी पढ़ते और सुनते होंगे.
अगर हम ध्यान से देखें, तो यह देखते हैं कि इन सभी मे ज्यादातर खबरें बुरी ही होती है.
उदाहरण के रूपमें कहीं पर भारी विपत्ति आना, किसी की मृत्यु हो जाना, कहीं पर चोरी होना ,भ्रष्टाचार का बढ़ना, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार इत्यादि
हम इन खबरों को तीन भागों में बांट सकते हैं.
पहली,वह खबरें जो बुरी और अच्छी होती है
दूसरी,वे खबरे जो कुछ लोगों के लिए अच्छी और बाकी लोग के लिए बुरी होती है या कुछ खबरें जो अच्छी होती है पर कुछ समय बाद बुरी प्रतीत होने लगती है
तो मेरा आपसे फिर से पूछता हूं कि क्या आपने आज खबर सुनी?
क्या यह खबर अच्छी थी? या यह खबर बाकी खबरों की तरह बुरी थी !
क्या आप कोई ऐसी खबर के बारे में सुना है जो संसार की सभी लोगों के लिए खुश खबर या कहें सुसमाचार हो??
ऐसी एक ख़बर है !
आइए देखते हैं कि वह खबर क्या है.
बाइबिल हमे इस सुसमाचार के बारे मे बताती है
बाइबल हमे बताती है कि परमेश्वर जो संसार को बनाने वाला है.
मुझे और आपको बनाने वाला है वही परमेश्वर हमसे इतना प्रेम करता है, की जब हम अपने बुरे कामों में फंसे हुए थे और पापी में थे परमेश्वर ने हमे पापो से छुड़ाने के लिए अपने एकलौते पुत्र को दे दिया ,ताकि जो कोई उस पर विस्वास करे वह नष्ट ना हो पर अनन्त जीवन पाए
क्या आप पाप करते?
क्या आप बुरा काम करते है ?……..इससे पहले की आप कहे नही, जरा सुनिये
बाइबल बताती है कि सब पापी है सब पाप करते है हर कोई बुरे काम करता है
जरा सोचिए
क्या आप गुस्सा नहीं होते?
क्या आप लोगों से जलन नहीं रखते?
क्या आप किसी से नफरत नहीं करते ?
क्या आपने कभी झूठ नहीं बोला, या बोलते??
क्या आप कभी घमंड नहीं करते ?
हां हम सभी करते हैं मैं खुद करता हूं
कुछ पाप तो छुपे रहते है और कई सामने आ जाते है , कई पाप इनसे भी बड़े होते है जिनके बारे में हम खबरों और समाचारो में सुनते है
तो हम सभी पापी है ओर यह हमारे लिए बुरी ख़बर क्योंकि वचन कहता है कि जिसने पाप किया है वह मृत्यु का हकदार है क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है.
तो हम क्या करें ?
क्या हमारे लिए कोई आशा है ?
क्योंकि यह तो हमारे लिए बुरी खबर है.
हा हमारे लिए आशा है और यह है सुसमाचार
और हम आज जानेगे की सुसमाचार क्या है? इसकी शुरुआत कैसे हुई? और क्यों हुई?
पवित्रशास्त्र या कहे बाइबल
जिसके वचन से मैं आज आपको बताने वाला
वह यह है मरकुस की किताब के अध्याय 1 पहला वचन
हा! सिर्फ एक ही वचन !!!
इससे पहले कि मैं आगे बढ़ो
मैं आपको बताना चाहता हूं,कि यह किताब पतरस, जो येशु मसीही का चेला था,की किताब है जिसे मरकुस जोकि पतरस का चेला था. पतरस ने मरकुस के द्वारा यह पुस्तक लिखी है.
यह किताब पवित्र शास्त्र(बाइबिल)के नए नियम का भाग है
यह येशु मसीही की लोगों के बीच में की गई सेवकाई के बारे में बताती है. इसका उद्देश्य यह है,कि यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है जो दुनिया में आया!
ताकि हमे हमारे पापो से छुटकारा दिला सके और हमे अनन्त जीवन दे
चलिए शुरू करें मरकुस1:1 यह वचन इस बात को बताना चाहता है कि, यह सुसमाचार अब तक के इस दुनिया में आए सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के बारे में है इसलिए मरकुस वहलिखता है येशु मसीह! जो कि चुना हुआ और परमेश्वर का पुत्र है!
‘मसीह’ शब्द इब्रानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है चुना हुआ, मतलब येशु मसीह चुना हुआ था पर किसलिए इसे जानने के लिए यह समझना अवश्य है कि सुसमाचार की सुरुआत कैसे और कब हुई??
चलिये जानते हैं कि इस सुसमाचार की शुरुआत कब हुई अगर हम देखें पवित्र शास्त्र के पुरानी नियम में तो हम पाएंगे कि “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि’ की,इसके साथ-साथ उसने ‘मनुष्य को भी बनाया’
परमेश्वर ने हमें इच्छा दी और उसके बाद मनुष्य ने पाप किया और परमेश्वर की आज्ञा का उलंघन किया और इस प्रकार पाप जगत में आया,और पूरी मानव जाति में फैल गया.
यह पाप जो पूरी मानव जाति में फैला बढ़ता चला गया , मनुष्य में पाप किया और क्योंकि परमेश्वर सच्चा न्यायी है. इसलिये पवित्र शास्त्र बताता है कि परमेश्वर हर एक को उस के कामों के अनुसार दंड देगा.
और हम सभी परमेश्वर के आगे दोषी है और इसलिए सजा के पात्र है
इसलियर सुसमाचार के द्वारा परमेश्वर ने हमे हमारे पाप की क्षमा के लिए आशा दी.
हमने देखा कि हमें सुसमाचार की क्या आवश्यकता है क्योंकि हम पापी है और पाप की मजदूरी मृत्यु है इसलिए परमेश्वर ने हमें पापा से और शैतान से जो हमें पाप की दासता में डालता है,छुड़ाने के लिए अपने ‘”चुने हुए” के द्वारा हमें पापो से क्षमा देता है
अब हम देखते है कि किस प्रकार से यह सब हुआ,,,।।।
बाइबल(पवित्र शस्त्रा)हमे बताती है की
शुरुआत में परमेश्वर ने आदम और हव्वा जो कि पहले मनुष्य थे. जिन्होंने पाप किया पर परमेश्वर ने उनके साथ वाचा बाधी उत्पति 3:15 ” हव्वा से एक पुत्र आएगा जो शैतान का सर कुचलेगा”. वही शैतान जिसने आदम हवा को भरमाय था,की वे परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करें.
इसके बाद परमेश्वर अब्राहम(जो की आदम और हव्वा के द्वारा आई मानव जाति में से एक थे) से भी वाचा बाधता है उत्पति के अघ्याय 12 में “कि तेरे वंश से एक पुत्र आएगा जो संसार के सभी लोगों के लिए उद्धार का कारण बनेगा”
इसके बाद परमेश्वर ने दाउद(जो की इस्राएल का राजा था) से वाचा बांधी, कि मैं एक ऐसे राजा को लाऊंगा जिसके राज्य का अंत कभी ना होगा और वह पापो की क्षमा और दुनिया मे शांति लाएगा, परमेश्वर ने यह वाचा भी बांधी की जो आने वाला है. वह मेरा चुना हुआ है वह संसार को पाप से छोड़ आएगा और उनके दिलों को बदल देगा जो उस पर विश्वास करेंगा वह अनन्त जीवन पायेगा.
इस प्रकार सुसमाचार की शुरुआत हुई, परमेश्वर ने लोगो से वचाये बाधी, की संसार के पापो को उठाने के लिए में अपने चुने हुए को भेजेगा जो सैतान का सर कुचलेगा और संसार के लिए छुटकारे का कारण बनेगा,यह परमेश्वर का चुना हुआ लोगो को पापो से छुटकारा दिलाएगा और लोगो के दिलो को नया कर देगा
चलिए इस और भी दाग़ से समझते हैं कि जो बाइबिल हमें बताती है सुसमाचार वह असल में क्या है किसके बारे में है ?क्यों अवश्य है? कि हम इस पर विश्वास करें
जैसा की हमने बाइबल से जाना की किस प्रकार से परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह के सुसमाचार का आरंभ हुआ
पर सुसमाचार है क्या!!!!!
चलिए देखते हैं ,
सुसमाचार शब्द यूनान भाषा के शब्द evanglion से आया है जिसका अर्थ होता है कि “शुभसन्देश” या कहे ” आनंद का समाचार.
इस शब्द के अनुसार यह जो खबर है वह राजा के बारे में है जोकि उसके लोगों(राजा की प्रजा) के लिए आनंद की खबर है.
यह राजा जिसकी खबर हम सुनने वाले हैं वह कोई और नहीं ,येशु मसीह है.वही राजा जिसके बारे में परमेश्वर ने दाऊद से वाचा बाधी थी
परमेश्वर का चुना हुआ और जैसा मरकुस कहता है “परमेश्वर का पुत्र मसीह येशु”!!
इसे समझने के लिए यह जानना अवश्य है कि यीशु मसीह के जीवन की शुरुवात मनुष्य के रूप में कब हुई? अब आप कहेंगे! क्या !!
मनुष्य के रूप मे ?
मनुष्य के रूप में इसलिए क्योंकि येशु मसीह आदि से पहले ,दुनिया की शुरुआत से पहले से ही अस्तित्व में है पर हमें हमारे पापों से छुड़ाने के लिए इस दुनिया में मनुष्य के रूप में आया वह परमेश्वर का पुत्र था, है और रहेगा !!!!
चलिए जानते हैं कि येशु मसीह परमेश्वर का पुत्र कैसे इस दुनिया में मनुष्य के रूप में आया और हमें पापों से में छुड़ाया
येशु मसीह का जन्म करीबन 2000 वर्ष पहले हुआ. वह बहुत ही छोटी से परिवार में जन्मा.
उनकी मां मरियम और पिता युसूफ थे.
येशु मसीह ने निष्पाप जीवन जिया !
जब वह बड़ा हुआ. तब यहून्ना बपतिस्मा देने वाले से बपतिस्मा लेकर येशु ने सेवाकार्य का आरंभ किया जिसके लिए वह इस दुनिया में आया था ,अर्थात पापों की क्षमा का कार्य
यहोन्ना बप्तिसमा देने वाले के द्वारा बपतिस्मा के बाद, येशु ने कई प्रकार के कार्य किए.
जैसे:-
-लोगों को बिमारियों से चंगा करना.
-बुरी आत्माओं को निकालना .
-मुर्दों को जीवित करना जैसे अनेक कार्य.
वह दुनिया में आया ताकि हमारे पापो को उठा ले. और हमें अनंत जीवन की आशा दे. इस कार्य को पूरा करने के लिए अपने जीवन के आखिरी सप्ताह में मसीह येशु ने क्रूस जान दी . ताकि हमारे पापों की सजा अपने ऊपर ले ले .और जैसा कि बाइबिल में लिखा है कुरिन्थियों 15:3-4 “मसीह हमारे पापों के लिये मर गया, और गाड़ा गया, और पवित्रशास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा,” फिर जी उठा….!
हा तीसरे दिन जी उठा!!
ताकि मृत्यु पर अपनी विजय को परमाणीत करे.
यह है सुसमाचार!!
मसीह परमेश्वर का पुत्र इस दुनिया में आया प्रेम के कारण, ताकि जो कोई पाप के कारण परमेश्वर से दूर हो गए थे उन्हें परमेश्वर ने मसीही यीशु के द्वारा अपने पास जीवित आशा के लिए बुलाया.
येशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है
येशु मसीह ने जो कार्य किए वह कोई मनुष्य नहीं कर सकता, केवल परमेश्वर ही है. जो मुर्दे को जीवित कर सकता है. वही है जो हर बीमारी को कहने या छूने भर से ही ठीक कर सकता है,अगर आप मरकुस की किताब को और पड़े तो आप पाएंगे,येशु मसीह के लोगो को चंगा करना,बुरी आत्मा को अधिकार के साथ लिकालन,तूफान को शांत करना,5000 से ज्यादा लोगो को 5 रोटी और दो मछली से खाना खिलाना और भी बहुत कुछ.
यीशु मसीह ने जो कार्य किये है वह केवल परमेश्वरी ही कर सकता है और यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है. जो कि पाप की समस्या के कारण मनुष्य बनकर आया ,ताकि पाप की बीमारी ,पाप की दासता से हमे छुड़ाए और हमे पापो की क्षमा प्रदान करे
यह आनंद का समाचार है।
तो हमे क्या करना है?
हमें प्रचताप यानी परमेश्वर से अपने पापो का अंग्गीकर करना है क्षमा मांगनी है और विश्वास करना है की येशु मसीह हमारे पापो के लिए मारा गया गड़ा गया और तीसरे दिन फिर जी उठा.
Application:-
इसलिए मेरा आपसे प्राशन है
की क्या आपने इस सुसमाचार को ग्रहण किया है ?
क्या अपने यीशु मसीह के द्वारा पापों की क्षमा के लिए किए गए कार्य पर विश्वास किया है ?
क्या आपके जीवन में सुसमाचार की शुरुआत हो चुकी है?
अगर अब तक आपने इस सुसमाचार पर विश्वास नहीं किया,तो बाइबल एक बुरी खबर भी बताती है.
जैसा कि बाइबल की पुस्तक रोमियो के अध्याय 6 के वचन 23 में लिखा है ”क्योंकी सब ने पाप किया है पापा की मजदूरी मृत्यु है”
अगर आपने यीशु मसीह में विश्वास नहीं किया तो आपको परमेश्वर के क्रोध का सामना करना पड़ेगा पर जो कोई उस परमेश्वर के पुत्र मसीही येशु में विश्वास करता है अनंत जीवन उसका है बाइबल का वचन कहता है “कि पृथ्वी पर कोई दूसरा नाम नहीं जिसके द्वारा उधार हो ” यीशु मसीह ही है जो हमारे ,मेरे,आपके पापो के लिए “मारा गया और गड़ा गया और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन फिर जी उठा ” अगर आप विश्वास करते है तो पापो की क्षमा और अनंत जीवन पाते है…और अगर विश्वास नही करते तो परमेश्वर के क्रोध में सहभागी होते है
अगर विश्वास करना चाहते हैं तो प्राथना करें और पापो का प्रचताप करे और परमेश्वर आपको क्षमा करेगा
जैसा की पहला यहून्ना 1:9 में लिखा है “यदि हम अपने पापों को मान ले तो वह हमारे पापों को करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग और अधर्मी है”
और वे लोग जो विश्वास करते है जो यीशु मसीह को अपने उद्धारकरता के रूप में विश्वास करते हैं जो मानते हैं कि यीशु मसीह जगत में आया उनके पापों के लिए मारा गया गाड़ा गया और फिर जी उठा
तो मेरा आपसे प्रशन है कि क्या इस आनंद के सुसमाचार को आप अपने रोज के जीवन में विश्वास के साथ जीते हैं??
क्या आप रोज वचन पढ़ते हैं ?
क्या वचन पर चलते हैं? क्या आप परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं?
क्या आप अपना जीवन परमेश्वर की महिमा के लिए जीते है.
में आप से अनुरोध करता हूं कि वचन पड़े परमेश्वर की समझ में बड़े. क्योंकि बाइबिल में लिखा है रोमियो की किताब ,अधयाय 1 के वचन 17 में ” की धर्मी जान विश्वास से जीवित रहेगा”
इसलिए अपने जीवन को मसीही में विश्वास के साथ जिये.
पर यह विश्वास आता कैसे है ?
रोमियो की किताब,अधयाय 10 के वचन 17 में लिखा है”विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है।”
इसलिए वचन को पढ़े, पार्थना करे ,और परमेश्वर हर दिन आपकी मदद करेगा की आप विश्वास के साथ मसीही में अपना जीवन जेने पाए.
विश्वास करे !!
इस सुसमाचार या कहे खुश खबरी में, जो की अनंत जीवन के लिए हैं
में प्राथना करता हु की परमेश्वर आप को विश्वास दे ताकि अपने इस खुशखबरी को ग्रहड़ कर सके…..! आप सभी का सुक्रिया